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अनूपपुर आंगनबाड़ी केन्द्र 14/2 मे बाल भोज का कार्यक्रम संपन्न

आकाश गुप्ता ।

अनूपपुर/21 जनवरी 2021



आंगनबाडी केन्द्र14/2पर पोषण अभियान के अंतर्गत पोषण मटका में खाद्य सामग्री संकलित की जा रही है इच्छुक गणमान्य नागरिक स्वेच्छा से मटके में जो भी खाद्य सामग्री देना चाहते है मटके में डाल रहे है पोषण मटके में प्राप्त खाद्य सामग्री का उपयोग आंगनबाडी केन्द्र में दर्ज कुपोषित बच्चों को भोजन कराने के उपयोग में लाई जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संतोषी मिश्रा ने बताया कि गुरूवार को आंगनबाडी केन्द्र14/2 में बाल भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें 16 बच्चों को पोषण आहार के तहत पौष्टिक खाद्य सामग्री परोसी गई है वही बच्चों की माताओं को भी कुपोषण क्यो होता है और कैसे बचे की जानकारी दी गई है।

कुपोषण के कारण के बारे में बात की जाए तो, इसकी चपेट में आने का मुख्य कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना है। यह रोग आमौतर पर छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अधिक होता है। जिन बच्चों को और गर्भवती महिलाओं को सही आहार नहीं मिलता है वो इस रोग से ग्रस्त हो जाते हैं।


कुपोषण के लक्षण

कुपोषण होने पर मसूड़ों में सूजन आ जाती है और दांतो में सड़न हो जाती है।

पे भीट फूलना, अधिक ज्यादा रोना, चिड़चिड़ापन भी कुपोषण के लक्षण होते हैं।

मांसपेशियों में खूब दर्द होना।

हड्डियों-जोड़ों में दर्द रहना और नाखूनों का अपने आप टूटना  जाना।

भूख का ना लगना और आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ना।


कुपोषण से बचने के उपाय

कुपोषण से बचने के लिए हरी सब्जियों का सेवन खूब करें। हरी सब्जियां खाने से इस रोग से बचा जा सकता है। पालक, बींस, गाजर, गोभी और इत्यादि प्रकार की सब्जियों में विटामिन और मिनरल्स भरपूर पाए जाते हैं और इन्हें खाने से बच्चों को स्वस्थ शरीर मिलता है।बींस के अंदर मौजूद तत्व इस रोग को जड़ से खत्म कर देते हैं। बींस की सब्जी को काटकर उबाल लें और इसमें नमक छिड़ककर खाएं। एक महीने तक ये सब्जी और अन्य सब्जियां खाने से शरीर को सभी तरह के विटामिन और मिनरल्स मिल जाते हैं। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संतोषी मिश्रा सहायिका राधा कुशवाहा मौजूद रहे।

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