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कोरोना आपदा में नि:स्वार्थ सेवा के पर्याय बने संघ के स्वयंसेवक

समाज के प्रति लगाव और समर्पण ही सच्चा देश प्रेम

( मनोज कुमार द्विवेदी, अनूपपुर , मप्र

अनूपपुर /4 जनवरी 2020 



 वैश्विक कोरोना आपदा का लाकडाउन वाला समय गरीब, मजदूर, हाकर, रेहडी - खोमचे वालों के लिये बहुत कठिन रहा है। सिद्धांत, आदर्श, नियम - कायदों , नेताओं की अपील से परे समाज का यह वर्ग अफवाहों , साजिशों, गलत फहममियों, नासमझी के साथ - साथ पेट की आग से परेशान होकर सडकों पर उतरने को मजबूर हो गया। तब सरकार की सारी योजनाएं, सारे समीकरण ध्वस्त होते दिखे। 

लाकडाउन के पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जो जहाँ है, वहीं रहे। अन्य राज्यों में नौकरी कर रहे लाखों कामगारों को राज्य सरकारें संभाले रखने में नकारा साबित हुईं। यद्यपि सरकार ने राशन, गैस सिलेण्डर, नकद की व्यवस्था जरुर की थी। इसके बावजूद यह मानों जनता में भरोसा जगाने के लिये पर्याप्त नहीं था। 

  लाकडाउन में सडकों पर पलायन कर घर वापस जाते लाखों लोगों के साथ घरों में बन्द असहायों, निर्बलों , गरीबों की सहायता के लिये तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने हाथ आगे बढाए।

संघ स्थापना काल से ही देश मे आये हर संकट के समय अपना महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।

 भीषण कोरोना बीमारी को मात देने के लिए संघ के स्वयंसेवकों ने महाकौशल प्रांत के जबलपुर, सागर, रीवा व शहडोल संभाग के 21 जिलों में स्थान-स्थान पर आवश्यक सेवा कार्य के लिये मोर्चा संभाला।

लॉक डाउन की इस लम्बे कठिन समय में लगभग 6501 स्वयंसेवको ने जबलपुर, सागर, रीवा व शहडोल संभाग के 21 जिलों के सभी तहसीलों व सभी नगरों के 852 स्थान पर विभिन्न प्रकार सेवा कार्य किए ।

ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्र की अत्यंत पिछड़ी बस्तियों में घर घर जाकर स्वयंसेवकों ने45842 राशन किट पहुंचाये । मण्डला जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में निवासरत बैगा जनजाति के बीच जब स्वयंसेवक राशन लेकर गए तो आंखें खुली की खुल रह गई अनेक परिवार ऐसे मिले जिनके घर पर दो समय का राशन तक नही था स्वयंसवेकों ने वहां सबको राशन दिया।

अनूपपुर जिले में भारत विकास परिषद तथा सामाजिक समरसता मंच से जुड़े स्वयंसेवकों ने लाकडाउन के पूरे समय जबर्दस्त जागरुकता एवं संपर्क के बूते जिला प्रशासन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला, विभाग एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के सहयोग से अन्य राज्यों में फंसे लोगों की घर वापसी, पलायन कर घर वापस जा रहे लोगों को वाहन, राशन, भोजन उपलब्ध करवाने, जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में घरों में बन्द हजारों जरुरत मंदों को राशन उपलब्ध करवाया। एक स्वयंसेवक द्वारा अनूपपुर - राजेन्द्रग्राम मार्ग में स्थित अपने प्रतिष्ठान मिड - वे ट्रीट में लगभग तीन माह तक प्रतिदिन यात्रियों के लिये नि: शुल्क भोजन, रुकने की व्यवस्था कर अनुकरणीय मानवीय संवेदना - सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया।

 पूरे प्रान्त में अनेकों उदाहरण देखने मे आये।

महाकौशल प्रांत मे 191522 भोजन पैकेट तैयार कर जरूरतमंदों को भोजन भी करा गया । पूरे प्रान्त में लगभग सभी 21 जिलों में एक स्थान पर भोजन बनाकर जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने का काम स्वयंसेवको ने किया ।

ऐसे भयावह संकट के समय जब पता चला कि देश मे मास्क की अत्यधिक कमी है । स्वयंसेवक परिवार की महिलाओं ने अपने घर पर ही मास्क बनाने का संकल्प लिया और 127449 मास्क निर्माण कर स्थान- स्थान पर जाकर वितरित किये । ऐसे ही अनूपपुर से सूचना मिलने पर जबलपुर बस स्टैंड में अन्य राज्य से आए 40 लोगों के जत्थे को भोजन की व्यवस्था कर साधन उपलब्ध करवा कर अनूपपुर पहुंचाया गया।

महाकौशल प्रांत से अन्य प्रांतों में फंसे ऐसे 5418 लोगों को जहाँ वे हैं , वहीं आवश्यक पूर्ण सहायता किया । केरल के कन्नूर जिले में सिवनी और छिंदवाड़ा के 24 मजदूर कमाने के लिए गए और लॉकडाउन के कारण वहाँ से निकल नही पाए । उनके पास राशन पानी की समस्या आ गईं क्योंकि अभी गए ही सात दिन भी नही हुए थे । किसी ने उनको जबलपुर के एक संघ कार्यकर्ता का नम्बर उपलब्ध कराया । वहां से राजेश नाम के मजदूर का संघ के कार्यकर्ता को फोन आया और उसने अपनी समस्या से अवगत कराया । संघ कार्यकर्ता ने तत्काल कन्नूर के स्वयंसवेकों से सम्पर्क किया । कन्नूर के स्वयंसेवकों ने उन सभी 24 मजदूरों की वही पर आवश्यक पूर्ण सहायता किया । ऐसे ही पूना मुम्बई इंदौर भोपाल आदि अनेक शहरों में फंसे चाहे वो मजदूर हो विद्यार्थी हो सब की सहायता संघ के स्वयंसेवकों ने किया ।

अन्य प्रदेशों से आये हुए 1217 लोगों को स्वयंसेवकों ने स्टे होम भी कराया । इस संकट काल में पूरे प्रांत में अभी तक 189 स्वयंसवेकों ने रक्तदान भी किया ।

 12270 लोगों को आयुर्वेदिक काढ़ा भी स्वयंसेवको ने जगह जगह पिलाया ।

लॉकडाउन के दौरान पशुओं की भी समस्या स्वयंसेवको के ध्यान में आई और स्वयंसेवक इस कार्य में भी जी जान से जुट गए । सभी 21 जिलों में पशुओं के लिए चारा भूसा भोजन की व्यवस्था किये ।

इसी बीच इस संकट काल में समाज के लिये 24 घण्टे कोरोना से लड़ने वाले 9440 राष्ट्र योद्धाओं ( चिकित्सक, स्वच्छता कर्मी, सुरक्षा कर्मी एवं अन्य भाई बहनों ) का स्वयंसेवको ने अपने परिवार के साथ अक्षत पुष्प पैर धोकर आरती उतारकर सम्मान किया ।

 2020 का कोरोना आपदा वस्तुतः इंसानियत की परीक्षा का वर्ष रहा है। ईश्वर ने इस आपदा में सब की परीक्षा ली। एक ओर ऐसी भी घटनाएं सामने आईं जब शहडोल से रांची तक मरीज को ले जाने का 75 हजार रुपये किराया वसूला गया तो दूसरी ओर कुछ अस्पतालों द्वारा मनमानी फीस वसूली गयी। कहीं लोगों की सहायता के लिये एकत्रित किया गया राशन , बाजार में बेंच देने की शिकायत मिली,  तो कहीं शराब की तस्करी जोरों पर थी। लेकिन मुनाफाखोरी का यह महज कुछ अध्याय ही था। अन्यथा स्वयंसेवकों के साथ बहुत से ऐसे लोग भी थे जिन्होंने वैश्विक आपदा के इन दिनों में गरीबों - जरुरत मन्दों की जमकर सेवा की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने महाकौशल प्रांत के साथ देश भर में हर जगह समाज की, पीड़ित मानवता की जमकर सेवा की है। यद्यपि इसमें नया कुछ भी नहीं है। संघ के स्वयंसेवकों का यह सेवाभावी नि:स्वार्थ स्वरुप हमेशा देखने को मिलता रहा है। इसकी जितनी सराहना की जाए वह कम ही है। अनुकरणीय।

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