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कांग्रेस के सभी पदो से विश्वनाथ ने दिया इस्तीफा, 30 वर्षो तक की पार्टी की सेवा और नही मिला जनसेवा का मौका

प्रेसवार्ता का आयोजन कर कांग्रेस की खामियां की जग-जाहिर

विधानसभा अनूपपुर में कांग्रेस भारी नुकसान का सामना करना पडेगा, कांग्रेस के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी विश्वनाथ ने उपचुनाव में कद़्दावर नेता से सामना करते हुए लगभग 41 हजार मत प्राप्त किये थे, उसके बाद जब उन्होने एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सभा बूथो में जाकर लोगों का आशीर्वाद मांगा, लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस पार्टी ने टिकट नही दी, जिससे झुब्द होकर कांग्रेस का एक बहुत बडा धडा कहे जाने वाले विश्वनाथ ने इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लिया।

अनूपपुर। 



पूरे मध्यप्रदेश में कांग्रेस का टिकट वितरण विवादों में रहा है, कई विधानसभा में उलटफेर चुनाव से पहले देखे जा रहे है। वही अनूपपुर विधानसभा में 30 वर्षो से कांग्रेस पार्टी की सेवा करने वाले गरीब आदिवासी विश्वनाथ ङ्क्षसह कुंजाम ने सोमवार 31 अक्टूबर को कांग्रेस के सभी पदो से इस्तीफा देते हुए भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर लिया। भाजपा प्रत्याशी व पूर्व खाद्य मंत्री बिसाहूलाल ङ्क्षसह से विश्वनाथ को सदस्यता दिलाई। विश्वनाथ के साथ-साथ कांग्रेस में पदाधिकारी रहे अधिवक्ता व प्रख्यात प्रवक्ता अखिलेश ङ्क्षसह ने कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इसके साथ कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने वालों में सेवादल के अध्यक्ष जीतेन्द्र सोनी, मंडलम प्रभारी सकरा मान ङ्क्षसह, मोहन साहू सहित सैकडों लोगों ने कांगे्रस पार्टी से इस्तीफा दे दिया, जिसका लिस्ट तैयार कर प्रेसवार्ता में दिखाया। आने वालें समय में सभी एक जुट होकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।

कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ झूठ बोलती है : विश्वनाथ सिंह



कांग्रेस, प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने आज से दो वर्ष पूर्व ही प्रदेश कार्यालय में यह कहा था कि किसी भी जिलाध्यक्ष को कांग्रेस उम्मीदवार नहीं बनाएगी और जो लोग चुनाव लडऩा चाहते है और जिलाध्यक्ष के पद पर हैं, वे अपने पद से इस्तीफा दे दे, और दावेदारी करें। इसी क्रम में अनूपपुर जिले से जिलाध्यक्ष फुन्देलाल सिंह ने इस्तीफा दिया था, तब कमलनाथ ने जिलाध्यक्ष रमेश सिंह को यह कहकर बनाया था कि आपको चुनाव लड़वाना है, चुनाव लडऩा नहीं है और मुझे यह आश्वासन दिया था कि तुमको 2023 का चुनाव लडऩा है, क्षेत्र में कड़ी मेहनत करो, इस विश्वास पर मैनें पूरे तीन वर्ष अनूपपुर विधान सभा में बूथ स्तर तक कड़ी मेहनत की। रणदीप सुरजेवाला जी ने भी भोपाल में प्रेस कान्फ्रेंस करके यह कहा था कि किसी भी जिलाध्यक्ष को पार्टी चुनाव नही लड़ाएगी। इसके बावजूद जब फसल काटने का समय आया तो पार्टी ने जिलाध्यक्ष रमेश सिंह को उम्मीदवार बनाया. इस प्रकार कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं से एवं जनता से सिर्फ और सिर्फ झूठ बोलती है।

अपना वचन नही करते पूरी

केन्द्रीय नेता और मध्यप्रदेश के चुनाव प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने अपने सभी कार्यकर्ताओ एवं दावेदारों को यह वचन दिया था कि किसी भी जिलाध्यक्ष को उम्मीदवार नही बनाएंगे और अपने कार्यकर्ताओं को बेवकूफ बनाकर कांग्रेस में कई जिलाध्यक्षों को पार्टी ने टिकट दिया। इस प्रकार जो कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओ से अपना वचन पूरा नही कर सकती एवं जनता को झूठ बोलकर सिर्फ और सिर्फ छलने का प्रयास कर रही है।

कांग्रेस का हाथ अमीरो के साथ है

कांग्रेस ने अपना नारा दिया है कि उसका हाथ गरीबों के साथ है और मुझे जब टिकट नहीं दिया गया, तो मैं कारण पूछने जब भोपाल गया तो मुझे प्रदेश के तमाम नेताओं ने कहा गया कि तुम्हारे पास चुनाव लडऩे के लिए रूपये नहीं है और रमेश के पास चुनाव लडऩे के लिए बहुत रूपये है, जिससे स्पष्ट हैं कि कांग्रेस का हाथ गरीब आदिवासी के साथ नहीं है, सिर्फ आदिवासियों को छलने की नियत से उनसे कड़ी मेहनत जमीनी स्तर पर कराया जाता है, और कभी किसी गरीब आदिवासी को आगे बढऩे का अवसर नहीं दिया जाता है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के इतिहास में पहली बार रूपये लेकर टिकट बेचने का आरोप लगा हैं जिससे यह प्रमाणित है कि कांग्रेस का हाथ सिर्फ और सिर्फ अमीरों के साथ है।

सर्वे के नाम पर निष्ठावान कार्यकर्ताओ से किया गया खेल

कमलनाथ ने सर्वे के नाम पर निष्ठावान कार्यकर्ताओं से घिनौना खेल खेला है, कमलनाथ ने जिस एजेंसियों से सर्वे कराया, वे सभी एजेसिया उनकी खुद की थी, जिनको टिकट देना था, उनके नाम पहले से सर्वे एजेसियो को दिये गये जिसका प्रमाण है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा जो सर्व सुनील, कानू, गोलू की टीम से कराया गया था, उसके सर्वे की रिपोर्ट में जो नाम थे, वे कमलनाथ के सर्वे रिपोर्ट से बिल्कुल भिन्न थे, जिनकी खबरे भी मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हुई, इसके बावजूद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने कमलनाथ की ही सूची को ही अंतिम रूप दिया, सबसे दुखत और पीड़ादायक बात तो यह है कि सर्वे के नाम पर टिकट वितरण की बात कहने वाली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुखिया कमलनाथ ने मीडिया के सामने यह कहा कि छिंदवाडा की टिकट सबसे पहले नकुलनाथ छिंदवाड़ा से घोषित करेंगे, उसके बाद टिकट दिल्ली से घोषित होगी।

यदि सर्वे ही सर्वे-सर्वा था, तो टिकटे क्यों बदली गयी

कमलनाथ कांग्रेस के सर्वे को टिकट का आधार बताया है, तो उनके सर्वे और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सुनील, कालू, गोलू के सर्वे में भिन्नता क्यों है, और यदि सर्वे ही सर्वे-सर्वा था, तो टिकटों की घोषणा के बाद कई सीटो पर टिकटे क्यों परिवर्तित की गयी। कांग्रेस गरीब आदिवासी को सिर्फ छलने का काम करती है, कांग्रेस ने ऐसे वक्त पर जब कांग्रेस का एक कद्दावर बड़ा नेता बिसाहू लाल सिंह वर्ष 2020 में भाजपा की सदस्यता लेकर भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री की शपथ ले लिये और 35 वर्षो के इतने बड़े कद्दावर नेता के खिलाफ अनूपपुर विधानसभा से कोई चेहरा नहीं था, तो कांग्रेस ने मुझे साफ-सुथरी स्वच्छ छवि जमीनी पकड़ का नेता बताकर कठिन समय में उप-चुनाव में बिसाहू लाल सिंह के खिलाफ उम्मीदवार बनाया, जब पूरी कांग्रेस भाजपा में समाहित हो गयी थी और जो बचे थे, वे अन्दर से भाजपा का काम कर रहे थे, सत्ता सरकार और दोनों संगठन मिलकर एक तरफ थे और मैं अकेला एक तरफ था, और मुझे चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा, इसके बाद मुझे तीन वर्षो तक निरन्तर कांग्रेस के बड़े नेताओ द्वारा आश्वासन दिया गया कि आप बूथ स्तर तक कांग्रेस को मजबूत करिए, आपको चुनाव लडऩा है, सबसे दुखद और पीड़ा दायक बात यह है कि जन आकोश रैली में जब कमलेश्वर पटेल का अनूपपुर आना था, तो रणदीप सुरजेवाला ने फोन करके यह कहा कि अधिसूचना लगने के पूर्व का यह कांग्रेस का अंतिम कार्यक्रम है, ज्यादा से ज्यादा गाडिया लगाओ और भीड़ इक_ा करो 8-9 अक्टूबर का तुम्हारी टिकट घोषित हो जाएगी और जब 15 अक्टूबर को कांग्रेस ने लिस्ट प्रकाशित की, तो अनूपपुर विधान सभा से मेरा नाम नही था, कठिन समय में कांग्रेस ने मुझे उम्मीदवार बनाया और जब अनुकूल वातावरण बना, तो मुझसे मेहनत कराकर फसल काटने के लिए दूसरे को उम्मीदवार बना दिया, जो कांग्रेस के असली चेहरे को उजागर करता है कि कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ गरीब आदिवासियों को छलने का काम करती है। उक्त कारणों से व्यथित होकर मैं कांग्रेस के सभी पदों से एवं प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।

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